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राजस्थान में चौहान वंश का इतिहास_Rajasthan GK Mock Test

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असली चौहान कौन है? चौहान वंश का गोत्र कौन सा है?

असली चौहान का परंपरागत इतिहास महत्वपूर्ण है, और इसकी उत्पत्ति कथाओं के अनुसार चौहान वंश की उत्तपत्ति ऋषियों द्वारा आबू पर्वत पर एक यज्ञ के अग्निकुंड से हुई थी। इस वंश के संस्थापक राजा वासुदेव चौहान माने जाते हैं। इतिहासविदों का मानना है कि चौहान वंश के सदस्य साम्भर तालाब के पास जयपुर, पुष्कर प्रदेश, और आमेर-नगर में निवास करते थे। माला - वाजुंस्ती गोत्र - वत्स चौहान वंश की प्रमुख शाखाये

सम्राट चौहान का असली नाम क्या है? पृथ्वीराज चौहान का सबसे बड़ा दुश्मन कौन था?

सम्राट पृथ्वीराज चौहान का असली नाम "पृथ्वीराज चौहान" ही था।पृथ्वीराज चौहान के प्रमुख दुश्मन के रूप में राजा जयचंद प्रमुख थे। राजा जयचंद के साथ हुए विवादों और उनके सामर्थ्य के कारण, वे पृथ्वीराज चौहान के महत्वपूर्ण दुश्मन थे।राजा जयचंद की बेटी संयोगिता और पृथ्वीराज चौहान की प्रेम कहानी बहुत प्रसिद्द है।

चौहान वंश का सबसे शक्तिशाली राजा कौन है?

चौहान वंश के सबसे शक्तिशाली राजा के रूप में पृथ्वीराज चौहान थे, जो चाहमान वंश के प्रतापी राजा माने जाते थे। नीचे शाकम्भरी और अजमेर के चाहमान शासकों की सूची दी गई है, जिसमें दिए गए उनके शासनकाल श्री आर बी सिंह द्वारा अनुमानित हैं।

भारत का अंतिम चौहान शासक कौन था?

हम्मीर देव चौहान, जिन्हें हम्मीरदेव के नाम से भी पुकारा जाता था, मध्ययुगीन काल में एक प्रमुख राजा थे जो राजस्थान में अपने विशेष महत्वपूर्ण शासनकाल के लिए प्रसिद्ध थे। वह चौहान वंश का अंतिम शासक था जिसने आधुनिक काल में रणथंभौर पर शासन किया था ।

अलाउद्दीन खिलजी और जलालुद्दीन खिलजी कौन थे? अलाउद्दीन खिलजी ने जलालुद्दीन की हत्या कब की थी?

जलालुद्दीन खिलजी और उनके नाती अलाउद्दीन खिलजी, भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण रूप से प्रसिद्ध राजा थे। जलालुद्दीन खिलजी के शासनकाल में ही उनके भतीजे अलाउद्दीन खिलजी ने उनके पूर्व स्वीकृति के बाद, 1292 ईसा पूर्व, भिलसा और देवगिरि में लूटमार का काम किया। इस घड़ी में देवगिरि को लूटना मुस्लिम साम्राज्य के लिए दक्षिण भारत पर पहला आक्रमण था। इन दो स्थानों पर लूटमार से अलाउद्दीन को अपार धन प्राप्त हुआ, जिसने उनके शासनकाल के दौरान उनके साम्राज्य को बढ़ावा दिलाया। 1296 के जुलाई महीने में, अलाउद्दीन खिलजी ने एक ऐतिहासिक पल में अपने चाचा और ससुर, जलालुद्दीन खिलजी की निर्दय हत्या कर दी और फिर स्वयं गद्दी पर बैठ गए। इस साघने के बाद, अलाउद्दीन ने बलबन के शासन की कठोर नीतियों को पुनः अपनाने का निर्णय लिया, जिसने उसके शासनकाल को एक और मोड़ पर ले जाया।

रणथंभौर किले का राजा कौन था?

रणथम्भौर किला, जिसे रणथम्भौर दुर्ग भी कहा जाता है, एक विशेष ऐतिहासिक स्थल है जिसका निर्माण किया गया था। यह किला चंदेल राजा जेता या महेश्वर के शासक रांतिदेव के समय में निर्मित किया गया था, इस पर विभिन्न ऐतिहासिक मान्यताएँ हैं। इसके अलावा, अन्य कई किंवदंतियाँ भी हैं जो इस किले के निर्माण के पीछे के किस्से को दर्शाती हैं।

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