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विज्ञान के महत्वपूर्ण तथ्य : General Science Questions in Hindi

विज्ञान के महत्वपूर्ण तथ्य 

☑ "लाल प्रकाश" की सबसे अधिक तरंग दैर्ध्य होती है जिससे हम इसे देख सकते हैं, और "बैंगनी प्रकाश" की सबसे कम तरंग दैर्ध्य होती है जिससे हम इसे नहीं देख सकते हैं।

☑ हाइड्रोजन (H) परमाणु ही एकमात्र ऐसा परमाणु है जिसमें नाभिक में कोई न्यूट्रॉन नहीं होता है।

काँसा ताँबा और टिन का मिश्रण है, जिसे "गन मैटल" कहा जाता है। पीतल ताँबा, टिन, और लैड का मिश्रण है। स्टेनलेस स्टील में लौह, क्रोमियम, कार्बन, और निकल का मिश्रण होता है।

तांबे का क्या उपयोग है?

1 रचना: ताँबा प्रमुखत: ताँबे की खाद्य पदार्थों की रचना में होता है।
2 गुणधर्म: अच्छी चालकता, अच्छी धातुगत रचना, ताँबे के लौह के साथ मिश्रित रूप में भी प्रयुक्त होता है।

स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) का क्या उपयोग है?

1 रचना: इसमें लौह, क्रोमियम, कार्बन, और निकल होते हैं और यह अधिकतम स्थिरता और स्ट्रेंथ के लिए प्रसिद्ध है।
2 गुणधर्म: यह अच्छी संवेगशीलता, उच्च ताकत, और जंक रोधी गुणधर्मों के लिए जाना जाता है।

दर्पण :

📌समतल दर्पण में वस्तु का प्रतिबिम्ब समान दिखाई देता है जिसका उपयोग घरोँ में किया जाता है।

📌उत्तल दर्पण मोटर वाहन चालक उपयोग में लेते हैं।

📌चिकित्सक कान, नाक, गले आदि के आंतरिक भागोँ की जाँच के लिए अवतल दर्पण का प्रयोग करते हैं।

उत्तल दर्पण का प्रयोग कहाँ कहाँ होता है?

उत्तल दर्पण का प्रयोग विभिन्न स्थानों में किया जाता है, जैसे कि वाहनों, धूप के चश्मे, और आवर्धक चश्मे। ये दर्पण पीछे देखने वाले यानी उभरे हुए पक्ष को दिखाने में मदद करते हैं, जिससे लोग अपने पीछे हो रहे घटकों या वाहनों को देख सकते हैं। इसके अलावा, इन्हें सूर्य की किरणों से होने वाली तेज चमक को कम करने और सुरक्षितता के लिए धूप के चश्मों या आवर्धक चश्मों के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण में क्या अंतर है?

अवतल दर्पण और उत्तल दर्पण में कुछ अंतर होते हैं:

1. प्रतिविम्ब के प्रकार:
अवतल दर्पण: इसमें वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिविम्ब बनते हैं।
उत्तल दर्पण: इसमें केवल आभासी प्रतिबिम्ब बनते हैं।
2. नामकरण:
अवतल दर्पण: इसे अभिसारी दर्पण भी कहा जाता है।
उत्तल दर्पण: इसे अपसारी दर्पण भी कहा जाता है।
ये अंतर दोनों प्रकार के दर्पणों के उपयोग और उनकी गुणधर्मों में होते हैं। अवतल दर्पण अधिकतम प्रतिविम्ब प्रदान करने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है, जबकि उत्तल दर्पण उच्च दृश्य स्थिति के लिए उपयुक्त होता है।

अवतल दर्पण का दो उपयोग क्या है?

अवतल दर्पण का मुख्य उपयोग विभिन्न स्थानों पर विशेषकर इसके फोकस को बढ़ाने में किया जाता है, और इसका विस्तारित प्रयोग निम्नलिखित हो सकता है:

1. टॉर्च, सर्च लाईट:
अवतल दर्पण को टॉर्च और सर्च लाईट्स में इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग विशेषकर रात्रि में सुरक्षा और खोज के क्षेत्रों में किया जाता है, जिससे दूर की जगहों को प्रकाशित करने में सहारा मिलता है।
2. गाड़ियों की हेड लाईट:
गाड़ियों की हेड लाईट्स में भी अवतल दर्पण का उपयोग होता है। यह चालकों को रात्रि में सुरक्षित चलने की सुविधा प्रदान करने के लिए फोकस को बढ़ाने में मदद करता है। इस तरह, अवतल दर्पण का उपयोग विभिन्न स्थानों पर विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जो प्रकाशित की जाने वाली क्षेत्र को बढ़ाने में मदद करता है।

📌सोडियम बाइकार्बोनेट को बैकिँग सोडा कहा जाता है।

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📌परमाणु बम नाभिकीय विखंडन पर आधारित है।

📌लाल, हरा तथा नीला प्राथमिक रंग हैं।

📌कोबाल्ट 60 का उपयोग कैंसर रोग में, रेडियो समस्थानिक स्वर्ण 198 का उपयोग रक्त कैंसर के उपचार में किया जाता है।

📌कैडमियम का नाभिकीय रिएक्टर में शृंखला अभिक्रिया के नियंत्रक के रूप में उपयोग किया जाता है।

📌सूर्य तथा हाइड्रोजन बम में उत्सर्जित ऊर्जा संलयन प्रक्रिया के उदाहरण हैं।

कोबाल्ट 60 किस तरह के कैंसर का इलाज करता है?

कोबाल्ट 60 (60 Co) एक विकिरण का स्रोत है जो स्वरयंत्र कैंसर के इलाज में प्रयुक्त होता है। यह एक अद्वितीय तरीके से कैंसर को नष्ट करने में मदद करता है।

कोबाल्ट 60 का उपयोग:
1 विकिरण थेरेपी: कोबाल्ट 60 से उत्पन्न होने वाली गामा किरणें कैंसर को नष्ट करने में मदद कर सकती हैं। ये किरणें कैंसर को बाधित करने और मृत करने के लिए उपयोग की जाती हैं।
2 प्राथमिक उपचार: कोबाल्ट 60 को स्वरयंत्र कैंसर के प्राथमिक उपचार के लिए उपयोग किया जाता है। यह तकनीक कैंसर के आदिकालीन स्टेज में होने वाले रोग के इलाज में सहारा प्रदान करती है।
3 ऊतक छान की अनुमति: कोबाल्ट 60 सतही ऊतकों की अच्छी छान की अनुमति देता है जिससे कैंसर को स्थानीय रूप से प्रभावित किया जा सकता है।
कोबाल्ट 60 का उपयोग स्वरयंत्र कैंसर के इलाज में एक प्रमुख तकनीक है, और इससे विकसित होने वाली कई और नई तकनीकों के साथ मिलकर यह कैंसर के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

परमाणु बम कौन से सिद्धांत पर कार्य करता है?

परमाणु बम नाभिकीय विखंडन सिद्धांत पर कार्य करता है। इस सिद्धांत का उपयोग अत्यंत संघर्षशील और नाशकारी शक्ति को उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। नाभिकीय विखंडन सिद्धांत में, एक विशेष प्रकार के नाभियां (न्यूट्रॉन्स) को एक परमाणु के केंद्र में धकेला जाता है, जिससे परमाणु की अस्तित्वात्मक ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। इसके परिणामस्वरूप, अद्भुत ताकत और उच्च तेज़ी से फैलने वाले नाभियों का समूह उत्पन्न होता है, जो बम के विस्फोट को उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार, नाभिकीय विखंडन से पैदा होने वाला प्रबल विस्फोट परमाणु बम को निर्मित करने में मदद करता है। हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु बम के हमलों ने इस तकनीक की खोज और विकास को सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दिया।

परमाणु रिएक्टर में नियंत्रण छड़ का उपयोग क्यों किया जाता है?

नियंत्रण छड़ का उपयोग:
परमाणु रिएक्टर में नियंत्रण छड़ का उपयोग एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह परमाणु रिएक्टर में हो रही श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है।
न्यूट्रॉन का अवशोषण:
नियंत्रण छड़, जो बोरॉन से बना होता है, न्यूट्रॉन को अवशोषित करने में सक्षम होता है। यह बोरॉन न्यूट्रॉन को अवशोषित करने के लिए अपेक्षाकृत अच्छा होता है, जिससे अधिक न्यूट्रॉन नहीं बचते हैं और अभिक्रिया को नियंत्रित रखा जा सकता है।
अत्यधिक ऊर्जा को नियंत्रित करना:
  • बोरॉन के छड़ द्वारा अधिक न्यूट्रॉन को अवशोषित करने से रिएक्टर में हो रही अत्यधिक ऊर्जा को नियंत्रित किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि अभिक्रिया अधिक हो रही नहीं है और रिएक्टर सुरक्षित रहता है।
  • अस्तित्वात्मक सुरक्षा:
  • नियंत्रण छड़ का उपयोग सुरक्षा की दृष्टि से भी किया जाता है, ताकि रिएक्टर में किसी प्रकार की अनियमितता या अस्तित्वात्मक घटना का सामना किया जा सके।
  • इस प्रकार, नियंत्रण छड़ का सही उपयोग करने से परमाणु रिएक्टरों को सुरक्षित रखने में मदद की जाती है और उनकी स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

    📌वायरस जनित रोग :

    • एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिसिएंसी सिँड्रोम), डेँगू ज्वर, पोलियो, चेचक, पीलिया (हिपैटाइटिस), रेबीज आदि।

    📌जीवाणु जनित रोग :

    • तपेदिक (क्षय), प्लेग, डिप्थीरिया, कोढ़ (कुष्ठ), मोतीझरा, टिटनेस, निमोनिया, हैजा आदि।

    📌आनुवंशिक रोग :

    •  हीमोफीलिया, मंगोलिज्म, वर्णांधता आदि।

    डेंगू ज्वर का कारण क्या है?

  • डेंगू ज्वर का कारण डेंगू वायरस होता है, जो एक बायर्ना वायरस है और डेंगू मच्छर (Aedes aegypti) के काटने के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है। यह वायरस चार विभिन्न सरकारी कोडों से जाना जाता है - डेंगू वायरस सीरोटाइप 1 (DENV-1), डेंगू वायरस सीरोटाइप 2 (DENV-2), डेंगू वायरस सीरोटाइप 3 (DENV-3), और डेंगू वायरस सीरोटाइप 4 (DENV-4)।
  • डेंगू वायरस के संक्रमण का प्रमुख तरीका डेंगू मच्छर के काटने से होता है। जब यह मच्छर एक संक्रमित व्यक्ति को काटता है, तो डेंगू वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद, जब यह मच्छर एक और व्यक्ति को काटता है, तो वायरस उस व्यक्ति के रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है और बीमारी का कारण बनता है।
  • डेंगू ज्वर के लक्षणों में बुखार, शीघ्र थकान, शरीर में दर्द, सिरदर्द, आँखों में लालामी, और हड्डियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं। यह ज्वर गंभीर स्थितियों में बदल सकता है और कभी-कभी जानलेवा हो सकता है, इसलिए इसका सही समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है।
  • एड्स क्या है और कैसे होता है?

    "एड्स, एक गंभीर बीमारी है जो एचआईवी वायरस के कारण होती है। इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में कमजोरी होती है, जिससे संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। एड्स एचआईवी इंफेक्शन का अंतिम चरण होता है।"

    📌शुद्ध जल का pH मान 7 होता है।

    📌24 कैरेट स्वर्ण को शुद्ध स्वर्ण माना जाता है।

    📌मानव शरीर में सबसे कठोर तत्त्व एनेमल (दाँतो पर) होता है।

    📌विटामिन ई चर्बी युक्त विटामिन है।Vitamin - E को एंटी स्टरलिटी (Anti Sterlity Vit.) भी कहते है। 

    📌भाप इंजन का आविष्कार जेम्स वॉट ने किया।

    📌पीने वाली शराब में एथनॉल एल्कोहल होता है।

    📌मानव का तापमान 310 K या 37° C होता है।

    📌भारत ने अपना पहला अंतरिक्षयान आर्यभट्ट 1975 में प्रक्षेपित किया।

    📌भारत की प्रथम जमीन से हवा में मार करने वाली निम्न दूरी की मिसाइल त्रिशूल है।